झल्ला
वैसे तो वो मेरा दोस्त हैं प्यार से मैं उसे जीत कहती हूँ, पर उसके सारे दोस्त उसे चन्नी कहते हैं ! जब से मैंने ये सुना हैं, मैंने भी उसे चन्नी बुलाना शुरू कर दिया हैं, वैसे तो उससे खूबसूरत भी कई चेहरे देखे पर नज़र जैसे उसपर आकर ठहर गई ! निगाहो को कोई नज़ारा देखना गवारा ही कहा था ! वो जब बेबाकी से हँसता हैं, उसके चेहरे की खूबसूरती और भी बढ़ जाती हैं, मुझे याद नहीं की इतनी प्यारी हसीं मैंने कभी किसीकी देखी हो, जैसे कोई मासूम सा बच्चा हँस रहा हो ! इतनी मासूमियत तो जैसे सिर्फ उसकी हँसी में हैं ! सारे जहाँ का गुम भुला देती हैं उसकी वो प्यारी सी हँसी ! जी करता हैं कही संभाल के रख लू उसकी ये हँसी और किसी को ना दूँ ! उसकी एक और चीज़ जो बहुत प्यारी लगती हैं वो हैं उसका कड़ा! उसकी प्यारी सी कलाई पे उसका वो वजनदार कड़ा जैसे कोई नयी इबारत लिख रहा हो जिसे आज तक ना किसी ने देखा ना पढ़ा ! फिर उसका वो मेरी बात मान लेना ऐसे जैसे मैं उसकी टीचर और वो मेरा स्टूडेंट ! कहता हैं मेरे लिए झांझर लाएगा प्यारी सी ! सोचा हैं हमेशा संभाल के रखूँगी उसकी निशानी के तौर पर ! कुछ लोग ज़िन्दगी के सफ़र में युही मिल जाया करते हैं, पर कब ज़िन्दगी में बेहद अहम् हो जाते हैं खबर नहीं लगती ! उसकी बातो से ना मेरा दिल भरता हैं ना मन ! अजीब सी कशिश हैं उसमे अपने से बांध कर रखता हैं और बंधन दिखाई भी नहीं देता ! अब और क्या कहु वो बेमिसाल हैं जिसकी मिसाल दी ही नहीं जा सकती ! तो ऐसे हैं हमारे चन्नी जी !
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